उप्र के गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने में शामिल हुई आईबी

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पायलट न्यूज़ पॉइंट

नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो आईबी को कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के वांछित अपराधी विकास दुबे का पता लगाने के अभियान में शामिल किया गया है। इंटेलिजेंट ब्यूरो के अधिकारी उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स एसटीएफ की मदद कर रहे हैं, ताकि अपराधी दुबे का पता लगाया जा सके। गौरतलब है कि इस गैंगस्टर के नाम पर करीब 60 मामले दर्ज हैं, इसके अलावा उसे राजनीति संरक्षण भी प्राप्त है। सूत्रों का कहना है कि इंटेलिजेंट ब्यूरो और स्पेशल टास्क फोर्स को संदेह है कि गैंगस्टर चंबल के बीहड़ों में छिपा हो सकता है। उन्होंने दुबे के ठिकाने का पता लगाने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस से मदद भी मांगी है। पुलिस उसके ठिकाने की तलाश में लगी है, वहीं अगर आगामी 24 घंटों के अंदर उसका पता नहीं चल पाता है तो राज्य सरकार उसका पता बताने वाले को भारी इनाम देने की घोषणा कर सकती है। जांच के दौरान या जानकारी सामने आई है कि दुबे का कई राज्य में राजनेताओं और कानून प्रवर्तन एजेंसी उप्र पुलिस के साथ गहरे संबंध थे। एक सिर्ष आईपीएस अधिकारी ने कहा, उप्र में बदमाशों राजनेताओं और नौकरशाहों के बीच सभी साठगांठ का खुलासा होगा। बीते दिनों पर सरकार ने कानपुर में स्थित गैंगस्टर के घरो को ध्वस्त कर दिया। विकास दुबे ने कानपुर में चौबेपुर पुलिस सर्कल के तहत विक्रम गांव में 8 पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अगर को गिराने से पहले घर के चारों ओर 50 मीटर के चित्र में घेराबंदी कर दी गई थी और दुबे के पिता और उसके परिवार के सदस्यों सहित नौकरों को परिसर को खाली करने के लिए कहा गया था। घरों के साथ ही वाहनों के पार्किंग स्थान को भी गिरा दिया गया। करीब 30 से 40 फीट ऊंची और मोटी दीवारों से गिरे घर को सुरक्षित रखने के लिए कांस्टेंस तार और 50 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। दुबे ने कानपुर और अन्य स्थानों पर करोड़ों रुपए की भूमि पर अवैध कब्जा किया था, इसके साथ ही उनके पास महंगे फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के अलावा कई लग्जरी गाड़ियां थी। बता देगी दुबे गिरोह ने शुक्रवार तड़के 8 पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसमें पुलिस उप अधीक्षक भी शामिल थे, वहीं इस घटना में 7 अन्य घायल हो गए। दुबे के खिलाफ हत्या के प्रयास की दर्ज शिकायत के आधार पर कार्यवाही करते हुए राज्य पुलिस की टीम बहुत ही सावधानी से गैंगस्टर को पकड़ने के लिए गई थी, लेकिन घात लगाए गैंगस्टर और उसके साथियों ने टीम पर हमला कर दिया। दुबे ने कई पार्टियों से सालों तक राजनीतिक संरक्षण का लाभ उठाया है। वही उसके खिलाफ 1993 से हत्या लूट अपहरण और जमीन हथियाने जैसे 60 मामले दर्ज हैं। साल 2001 में उस पर शिवली पुलिस स्टेशन के अंदर एक भाजपा नेता और राज्य मंत्री संतोष शुक्ला की हत्या का आरोप लगा था। हालांकि सबूतों की कमी के कारण दुबे को गिरफ्तार नहीं किया गया था।

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