गहलोत पर अब दो तरफ से होगा हमला

0
69

पायलट न्यूज़ पॉइंट

सीएम को अभी करनी पड़ेगी मशक्कत

कांग्रेस के युवा नेता सचिन पायलट की बगावत के बाद गहलोत सरकार फिलहाल बचती दिख रही हो लेकिन उनकी सरकार पर खतरा बरकरार है। भले ही सीएम अशोक गहलोत अपने पास बहुमत होने का दावा करें लेकिन सच्चाई यह है कि उन्हें अपने पक्ष में विधायकों को रोके रखने के लिए उनकी घेराबंदी करनी पड़ रही है। गहलोत अपनी सरकार उसी स्थिति में बचा सकते हैं, जब वह अपने विधायकों के साथ साथ समर्थन दे रहे निर्दलीय और अन्य दलों को अपने साथ सहेज कर रख पाए। दरअसल अब उनके यहां सिंह मारी कि कोशिशें दो तरफ से होगी। बीजेपी के साथ साथ पायलट खेमा भी सेंध लगाने की कोशिश करेगा। इसके लिए गहलोत की कोशिश होगी कि उनके साथ जो भी लोग हैं, उनकी मांगों और इच्छाओ को ध्यान में रखा जाए। पायलट व उनके दो सहयोगी के जाने के बाद वह सहयोगी दलों के महत्वकांक्षी विधायकों को कैबिनेट में जगह देकर उन्हें अपने साथ बनाएं रखने में सफल हो सकते हैं। इसके मद्देनजर मंगलवार को वह विधायक मीटिंग के बाद राजभवन भी गए थे। कहा जा रहा है कि राजभवन जाने के पीछे मकसद जहां उन्हें अपने कैबिनेट से निकाले गए मंत्रियों के बारे में औपचारिक सूचनाएं देनी थी, वहीं इसके पीछे कैबिनेट विस्तार की संभावना भी बताई जा रही है। चर्चा है कि आने वाले दिनों में गहलोत इसे अंजाम दे सकते हैं। वही बताया जाता है कि उन्होंने राजपाल को भी अपने पक्ष में 104 विधायकों के होने का दावा भी किया। बीजेपी ने गहलोत सरकार से बहुमत साबित करने की मांग की है। अगर आने वाले दिनों में उनके पक्ष से कुछ और विधायकों के जाने की खबर आती है तो बीजेपी उन्हें सदन में बहुमत साबित करने की चुनौती दे सकते हैं। गौरतलब है कि मंगलवार को बीटीपी विधायकों ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि उन्हें रिजल्ट में कैद करके रखा गया है। अगर बीटीपी के विधायक सचिव खेलने में चले जाते हैं तो गहलोत के पास 100 विधायकों का समर्थन ही बचेगा। जबकि बहुमत साबित करने के लिए 101 विधायकों की जरूरत है। अगर ऐसी स्थिति आती है तो उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। गहलोत की कोशिश होगी कि वह ऐसा किसी भी स्थिति में आने से पहले गवर्नर को अपने पक्ष में विधायकों को समर्थन पत्र दे दे।

हमने पायलट के लिए आज भी बैठक बुलाई थी। हमने सोचा था ईश्वर उन्हें सद्बुद्धि दे, पर वह आज भी नहीं आए। आपने आ बैल मुझे मार वाली कहा तो सुनी ही होगी।

कौन सी डगर पकड़ेंगे सचिन पायलट

सचिन पायलट ने अपना सब कुछ दांव पर लगाते हुए एक कड़ा कदम उठा तो लिया है, लेकिन उनके सामने विकल्प कोई बहुत ज्यादा और आसान नहीं है। कांग्रेस की ओर के लिए गए एक्शन के बाद उनके अब तक एक ही प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने उनके संघर्षशील वह हार ना मानने वाले इरादे को साफ कर दिया है। कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद मोटे तौर पर उनके सामने दो ही विकल्प हैं कि वह अपने मित्र ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह पर चलते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया जाए या फिर अपनी सारी ताकत समेटकर नई शुरुआत की जाए। हालांकि कांग्रेस की ओर से पायलट को सभी पदों से हटाए जाने का फैसला आने के बाद कहा जाता है कि बीजेपी की ओर से उनके लिए डिप्टी सीएम की पेशकश आई है, लेकिन उनके लिए वह तैयार नहीं बताए जाते। सीएम से कम किसी भी चीज के लिए तैयार नहीं होंगे। अगर उनके निकालने के बाद कांग्रेस सरकार नहीं गिरती है तो वह बीजेपी ने शायद ही जाए। दूसरा वह यह भी समझ रहे हैं कि अगर अशोक गहलोत की सरकार जाने के बाद बीजेपी ने उन्हें चाहिए सीएम बना भी दिया तो बीजेपी लंबे समय तक उन्हें इस पद पर रहने नहीं देगी। सचिन पायलट की स्थिति सिंधिया जैसी नहीं है, जहां बीजेपी के जाने मैं उनकी संभावना है कि वह बीजेपी व कांग्रेस से अलग जाकर अपनी तीसरा मोर्चा या रीजनल पार्टी बनाएं। हालांकि यह आसान नहीं है। राजस्थान की राजनीति को नजदीक से जानने वाले लोगों का मानना है कि यहां की राजनीति में तीसरी ताकत या दल के लिए कोई बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here